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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

वस्तुतत्त्वावबोधेन सर्वभावव्यवस्थितेः । ससृतिव्रततेर्बीजं संकल्पेनोपजायते ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई शंका करे कि ज्ञानिर्यो के भी मन है फिर उनमें आशा आदि क्यो उत्पन्न नहीं होते ? तो उस पर कहते हैं। ज्ञानियों का मन है यह बात ठीक है तथापि उनके मानस संकल्प में आशा आदि सब भावों की व्यवस्थापिका संसाररूपी लता के वासनारूपी बीज ही नहीं उगते, क्योंकि वे तत्त्वज्ञान से बाधित हो जाते हैं