Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
प्रज्ञावतां नयवतां धीराणां कुलशालिनाम् ।
जात्या राजससत्त्वानां मुख्यस्त्वं रघुनन्दन ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
आप में तो उसकी प्राप्ति की योग्यता है ही, ऐसा कहते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, ज्ञानवान्, प्रवीणकुशल, धीर ओर राजस-सात्त्विक जन्मवाले सत्पुरुषों में आप
मुख्य हैं