Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
यथाप्राप्तानुभवनात्सर्वत्रानभिवाञ्छनात् ।
त्यागादानपरित्यागाद्विज्वरो भव राघव ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, जो कुछ मिल गया उसका भोग करने, सभी जगह अभिलाषा न करने तथा त्याग
ओर ग्रहण का परित्याग करने से आप सन्ताप शून्य होइये