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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 50

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 50

संस्कृत श्लोक

अनन्तापारपर्यन्तवपुरात्मविदांवर । धराधरशिरोधीरो विज्वरो भव राघव ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

हे आत्मवेत्ताओं में भ्रष्ठ श्रीरामचन्द्रजी, आप संसार से भी विशाल शरीरवाले (सर्वव्यापक), पर्वतो के सिर के समान श्रेष्ठ यानी सुमेरु पर्वत के तुल्य धीर ओर सन्ताप रहित होइये