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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

पृथगात्मा पृथग्देही जलपद्मलवोपमौ । ऊर्ध्वबाहुर्विरौम्येष न च कश्चिच्छृणोति मे ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

शंका : विपुल जल के कमल के पत्ते में विन्दुरूप से आरूढ होने ओर परिच्छेद आदि में वायु आदि निमित्त प्रसिद्ध है । पूणत्मा के परिच्छेद द्वारा देह मे आरूढ होने में कौन-सा निमित्त है ? समाधान : ठीक है, मैं बार-बार भुजाएँ फैलाकर ओर गला फाडकर इस बात की घोषणा कर चुका हूँ कि आत्मा के परिच्छेद द्वारा देह में आरूढ होने में एकमात्र कारण पापी मन ही है, इसलिए उसके नाश के लिए ही प्रयत्न करना चाहिये, पर मेरी बात को कोई सुनता नहीं है