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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 38

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

ज्ञानस्यापरिपूर्णत्वान्न शक्रोषि मनोभ्रमम् । विनिवारयितुं मेघमसम्यग्यत्नवानिव ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे गृह रचना या गृह प्रवेश आदि सम्यग्‌ प्रयत्न से रहित पुरुष वृष्टि का निवारण करने में समर्थ नहीं होता वैसे ही ज्ञान के परिपूर्ण न होने के कारण तुम मनोभ्रम का निवारण करने में समर्थ नहीं हो