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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verses 33–34

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, verses 33–34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

भविष्यद्भूतकालस्थं यथा त्रैकाल्यदर्शिनः । प्रतिभाभेति गाधे यत्कटंजाचरितं तथा ॥ ३३ ॥ अयं सोऽहमिदं तन्म इति मज्जति नात्मवान् । अयं सोऽहमिदं तन्म इति मज्जत्यनात्मवान् ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे त्रिकालदर्शी योगी की दृष्टि से भविष्यत्‌ वस्तु भी उसके उत्तर काल में होनेवाले दृश्यमान पदार्थो की अपेक्षा भूतकालस्थ होती हे वैसे ही हे गाधे, अतीत कटंज का चरित भी वर्तमान प्रतिभा को प्राप्त होता है