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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verses 23–24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, verses 23–24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

तदुक्त्वास्व यथावस्तु महामोहनिवृत्तये । एकस्मिन्नेव विमले मां नियोजय कर्मणि ॥ २३ ॥ श्रीभगवानुवाच । ब्रह्मन् जगदिदं मायामहाशम्बरडम्बरम् । सर्वा आश्चर्यकलनाः संभवन्तीह विस्मृतेः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए महामोह की निवृत्ति के लिए उपाय कह कर झटपट न चले जाइये, किन्तु संशय से उत्पन्न मोह का नाश होने तक स्थित होइये ओर मुझे एक ही निर्मल कर्म में नियुक्त कीजिये