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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 22

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

गाधिरुवाच । भगवन्संस्मरंश्चैतामात्मनः श्वपचस्थितम् । इमां संसारमायां च परिमुह्यामि चेतसा ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

गाधि ने कहा : हे भगवन्‌, अपनी इस चाण्डाल स्थिति का चित्त से स्मरण कर रहा ओर इस जन्म, मरण आदि अनर्थ प्रचुर संसार माया का स्मरण कर रहा मैं अत्यन्त मोह को प्राप्त हो रहा हूँ