Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 63
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
वासनावलितं चेतः किं नामान्तर्न पश्यति ।
साधितं दृश्यते स्वप्ने वर्षसाध्यं प्रयोजनम् ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
वासनाओं से ओतप्रोत चित्त अपने भीतर क्या नहीं देखता, वर्ष भर में सिद्ध (पूरा)
होनेवाले कार्य को भी स्वप्न में सिद्ध हुआ देखता हे