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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 62

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 62 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 62

संस्कृत श्लोक

एवं सर्वं त्वया दृष्टं मोहजालं द्विजोत्तम । यत्सत्यमिति जानासि यच्चासत्यमवैषि च ॥ ६२ ॥

हिन्दी अर्थ

उसी प्रकार “मेने कीर देश को प्राप्त किया और कीरदेश के वासियों ने मुझसे चाण्डाल के राजा होने की कथा की" यह सब भी तुमने भ्रम ही देखा ॥ ६ १॥ हे द्विजोत्तम, इस प्रकार तुमने यह सब मोहजाल देखा है, जिसको तुम यह सत्य है, यों जानते हो और जिसको यह असत्य है, यह भी तुम जानते हो