Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 50
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
फलादि स्फारतामेति यथैव बहिरङ्कुरात् ।
बहिः प्रकटतां याति तथा पृथ्व्यादिचेतसः ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार अंकुर से फल, पुष्प आदि बाहर प्रकट होते हैं उसी
प्रकार पृथिवी, आकाश आदि पदार्थ भी मनोभाव को प्राप्त हुए आत्मा से बाहर प्रकट होते हे