Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
दैर्घ्यादैर्घ्येऽस्य कालस्य शरीरस्य भवाभवाः ।
कथमन्तस्थिता न स्युर्मदीयैः श्वपचभ्रमैः ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरे चाण्डाल
विषयक मिथ्या ज्ञान से कल्पित समयकी दीर्घता एवं अल्पता तथा चाण्डाल शरीर का जन्म ओर नाश
मन में ही क्यों न स्थित रहे वे बाहर कैसे स्थित हैं ?