Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
मुहूर्तमुपलब्धश्च जलान्तः स्वप्नविभ्रमः ।
कथं प्रत्यक्षतां प्राप्तो ममामलपदास्पद ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे अविद्यादिमल से रहित प्रतिष्ठावाले, मुञ्चे जल के अन्दर क्षणभर के लिए
स्वप्न की तरह उपलब्ध हुआ यह भ्रम अधिक काल तक दृष्टिगोचर क्यों हुआ ?