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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 42

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 42

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । एवं वदन्तमालोक्य हरिं गाधिर्द्विजोत्तमः । अर्चां कुसुमपूरेण पादयोः पर्यपूरयत् ॥ ४२ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रकार कह रहे विष्णु भगवान्‌ के दर्शन कर द्विज में श्रेष्ठ गाधि ने पुष्पों की राशि से भगवान्‌ के चरणों की पूजा की