Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
स दृष्ट्वा स्थगिताकाशं चलरेणुपयोधरैः ।
प्राक्तनीं राजतां स्मृत्वा समुवाचातिविस्मयः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
उड़ती हुई धूलिरूपी मेघों द्वारा आकाश को
आच्छादित करती हुई सेना को देखकर अपनी पूर्वराज्यावस्था का स्मरण करके अत्यन्त विस्मय को
प्राप्त हुए गाधि ने कहा