Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
श्रान्तस्तत्क्षणमात्रेण संभ्रमं दृष्टवानहम् ।
इति विज्ञाय सलिलादुदस्थादुदयार्कवत् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
थके हुए मैंने उस थकावट से ही क्षणभर में
ही भ्रम देखा। ऐसा विचारकर वह जैसे उदयाचल से सूर्य निकलते हैं वैसे ही जल से बाहर निकले