Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
यन्मया संभ्रमे दृष्टं सत्यभूतं द्विजेन तत् ।
उक्तं ममेति किं नाम स्यान्मायाशम्बरक्रमः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
“जो बात मैंने
भ्रान्ति दशा में देखी वही मेरे अतिथि ने सत्य कही । मेरा इस प्रकार का रूप शाम्बरी माया हे क्या ?