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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

बालस्य मातापितरौ नष्टौ किल ममामतेः । वातनीतस्य पत्रस्य वल्लीवृक्षमिवासिना ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे वायु से उड़ाये गये पत्ते का माता-पिता स्थानीय लताप्रधान वृक्ष तलवार से नष्ट हो जाता है वैसे ही मुझ मन्दभाग्य के माता और पिता, जब मैं बालक ही था तभी, मृत्यु से नष्ट हो गये थे