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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

भृशमालपतेऽप्यस्मे नालापं नागरा ददुः । मुक्ताजालयुतायापि कीचकायाध्वगा इव ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे पथिक वायु के कारण शब्द कर रहे तथा मोतियों की राशि से युक्त भी कीचकनाम के विशेष बाँसों को वचन नहीं देते हैं यानी उनसे बातें नहीं करते वैसे ही खूब पुकार रहे एवं मोतियों के हारों से अलंकृत भी उसे नगरवासियों ने प्रतिवचन नहीं दिया