Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
एक एव बभूवासौ जनमध्यगतोऽपि सन् ।
अर्थादिगुणनिर्मुक्तः परदेश इवाध्वगः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
यद्यपि वह बहुत से लोगों के बीच में रहता था तथापि जैसे परदेश में धन आदि गुणों से
रहित पथिक बहुत बड़े जनसमुदाय के बीच रहता हुआ भी अकेला ही रहता है वैसे ही वह भी अकेला ही
हुआ