Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verses 43–44
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, verses 43–44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
ता एनमासने सैंहे तत्राभिषिषिचुः क्रमात् ।
तस्मिन्नेव गजे शक्रमैरावत इवामराः ॥ ४३ ॥
एवं स श्वपचो राज्यं प्राप कीरपुरान्तरे ।
आरण्यं हरिणं पुष्टमप्राणमिव वायसः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
उन्होने जैसे
देवता ऐरावत हाथी पर इन्द्र का अभिषेक करते हैं वैसे ही उसी हाथी पर उसका सिंहासन में अभिषेक
किया