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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 41

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

भूषितः सविलासाभिर्बालवल्लीभिरावृतः । रत्नपुष्पांशुकाकीर्णः कल्पवृक्ष इवाबभौ ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

भाँति-भाँति के विलासों से युक्त ललनारूपी लताओं से परिवेष्टित ओर मणि और सुवर्ण के आभूषणों से विभूषित वह विलास युक्त छोटी-छोटी लताओं से परिवृत रत्नरूपी पुष्प ओर वस्त्रो से सुशोभित कल्पवृक्ष के समान सुशोभित हुआ