Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
तस्मिन्कटगते नेदुर्जयदुन्दुभयोऽभितः ।
कल्पाम्बुद इवाकाशमधिरूढे महार्णवाः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे प्रलयकाल के मेघ
के आकाश में आरूढ होने पर सागर गरजते हैं वैसे ही उसके गण्डस्थलपर आरूढ होने पर चारों ओर
विजय के नगारे बजने लगे