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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

ययौ मासाष्टकं तस्य मग्नस्य सरसोऽम्भसि । वासपङ्कजसंकोचमनाग्भग्नमुखच्छवेः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

तालाब के जल में डूबे हुए तथा निवास स्थानभूत तालाब के कमलों का सूर्य के वियोग से संकोच होने पर उनके सहवास स्नेह से तनिक मलिन मुखकमलवाले उसके आठ मास व्यतीत हो गये