Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अथैनं तपसा तप्तमाजगामैकदा हरिः ।
निदाघार्तं घनः श्यामः प्रावृषीव धरातलम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर एक समय जैसे वर्षा ऋतु में ग्रीष्म से
संतप्त पृथिवी तल पर काला मेघ आता है, वैसे ही तपस्या से कृश उसके पास श्यामलकान्तिवाले
भगवान श्रीहरि आये