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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

उत्फुल्लकमलं प्राप सरस्तत्र स विप्रराट् । चन्द्रः प्रसन्नविमलं तारासारमिवाम्बरम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

वहाँ पर जैसे चन्द्रमा अतिदर्शनीय अश्विनी आदि तारों से मण्डित ओर प्रसन्न-निर्मल आकाश को प्राप्त होता है वैसे ही वह विप्रराज फूले हुए कमलों से युक्त तालाब को प्राप्त हुआ