Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
किमप्यभिमतं कार्यं विनिधाय स्वचेतसि ।
बन्धुवृन्दाद्विनिष्क्रम्य तपस्तप्तुं वनं ययौ ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी अभीष्ट तपस्यारूप
कार्य को अपना लक्ष्य बनाकर वह बंधुओं के समूह से हटकर तपस्या करने के लिए वन मेँ चला गया