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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । यद्यद्राघव संप्राप्तं प्रह्लादेन महात्मना । तत्तदासादितं तेन पौरुषादेव नान्यतः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

अपने पौरुष से सिद्ध होनेवाली पुरुषार्थ सिद्धि में भगवान्‌ का वर भी द्वार विशेष ही है स्वतन्त्र नहीं है, इसलिए पूर्वोक्त नियम भंग नहीं हुआ , इस आशय से संक्षेप में उत्तर देते है। हे श्रीरामचन्द्रजी, महात्मा प्रह्लाद ने जो कुछ प्राप्त किया वह सब अपने पौरुष से ही उसने प्राप्त किया, दूसरे से नहीं