Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
आकारभासुरं त्यक्त्वा बाह्यमान्तरमप्यजम् ।
कुरु जन्मक्षयायाशु संविन्मात्रैकचिन्तनम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र, रुद्रादि देवाधिदेव चिरकाल तक पूजित हों और दया भी करते हों, फिर भी वे
मनोव्याधि के उपद्रवों से बचा नहीं सकते ॥ ३ ८॥ बाह्य इन्द्रियों से अनुभव में आनेवाले और अन्तःकरण
से अनुभव में आनेवाले भयानक विषयरूप का त्यागकर जन्मक्षय के लिए जन्मादि विकारशून्य सन्मात्र
का अखण्डाकार चिन्तन कीजिये