Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verses 37–38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verses 37–38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
तावज्जन्मसहस्राणि भ्रमन्ति भुवि मानवाः ।
यावन्नोपशमं याति मनोमत्तमहार्णवः ॥ ३७ ॥
ब्रह्मविष्ण्विन्द्ररुद्राद्याश्चिरसंपूजिता अपि ।
उपप्लवान्मनोव्याधेर्न त्रायन्तेऽपि वत्सलाः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
तब तक मनुष्य हजारों जन्मों तक संसार में भटकते रहते हैं जब तक कि मनरूपी मत्त
महासागर प्रशान्त नहीं हो जाता