Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
तां तु ये मानवा लोके बहुदुष्कृतिनोऽपि हि ।
धिया विचारयिष्यन्ति ते प्राप्स्यन्त्यचिरात्पदम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसको जो मनुष्य , चाहे वे बड़े पातकी ही क्यों न हों, संसार में बुद्धि पूर्वक विचार
करेंगे, वे शीघ्र परमपद को प्राप्त होगे