Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
प्रसादादात्मनो विष्णोर्मायेयमतिभासुरा ।
प्रबाधते न धीरांस्तु यक्षी मन्त्रवतो यथा ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
यह अत्यन्त दैदीप्यमान माया विष्णुरूप आत्मा के प्रसाद से धीर
पुरुषों को ऐसे ही पीड़ित नहीं करती जैसे मन्त्रसिद्धपुरुषों को पिशाची पीड़ित नहीं कर सकती