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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verses 21–22

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, verses 21–22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

आत्मावलोकनेनाशु माधवः परिदृश्यते । माधवाराधनेनाशु स्वयमात्मावलोक्यते ॥ २१ ॥ एतां दृष्टिमवष्टभ्य राघवात्मावलोकने । विहराशु विचारात्मा पदं प्राप्स्यसि शाश्वतम् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

इसीलिए उनके शरीर का दर्शन होने पर आत्मदर्शन होता है और आत्मदर्शन होने पर उनका दर्शन सुलभ हो जाता है, ऐसा कहते हैं। आत्मदर्शन से शीघ्र भगवान्‌ का दर्शन हो जाता है और भगवान्‌ की आराधना से शीघ्र अपने-आप आत्मा का दर्शन हो जाता है