Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
आत्मन्यकारणेनैव भूतानां कारणेन च ।
सृष्ट्यर्थं वपुरात्तं हि वासुदेवमयात्मना ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
उन्होंने काम, कर्म आदि निमित्तों से अपने में ही जगत् की सृष्टि के लिए वासुदेवमयरूप से शरीर ग्रहण
किया है, ऐसी ही श्रुति, स्मृति और पुराणों में प्रसिद्ध हे