Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
एकस्मिन्विद्यमाने हि कुतः शोकः कुतः क्षतिः ।
कुतो देहः क्व संसारः क्व स्थितिः क्व भयाभये ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कहें कि पिता के राज्य आदि के नाश आदि शोक के हेतु तो तुमने देखे ही है, उनका अपलाप
कैसे करते हो ? तो इस पर कहते है ।
एक तत्त्ववस्तु के विद्यमान रहते कहाँ से शोक, कहाँ से नाश ओर कहाँ से शरीर होगा ? कहाँ पर
संसार, कहाँ पर स्थिति ओर कहाँ पर भय और अभय होंगे ? भाव यह है कि सचमुच यहाँ पर मैंने शोक
के हेतु पिता के राज्यादिनाश आदि देखे, पर अद्वैत आत्मा में शोक हेतु नहीं है, इसलिए मेरी यह समाधि
शोक हेतुक नहीं है