Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verses 6–7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, verses 6–7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 6,7
संस्कृत श्लोक
अहमासमनन्तायामस्यां दृष्टौ महेश्वर ।
सर्वसंकल्पमुक्तायां व्योम व्योम्नीव निर्मले ॥ ६ ॥
न शोकेन न मोहेन न च वैराग्यचिन्तया ।
न देहत्यागकार्येण न संसारभयेन च ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महेश्वर,
मैं सब संकल्पो से निर्मुक्त इस अनन्त अन्तर दृष्टि मे निर्मल आकाश मेँ आकाश की तरह न शोक से,
न मोह से, न वैराग्य चिन्ता से, न देहत्याग के कार्य ओर न संसार भय से ही स्थित था। भाव यह कि शोक,
मोहआदि निमित्तो से मैं समाधि में स्थित नहीं था, जिससे मेरे देह त्याग का प्रसंग आता