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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verse 38

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

वाष्पश्रीर्नासुरीकर्णमञ्जरीः प्लावयिष्यति । वनराजिमिवोन्मत्ता सरित्तारतरङ्गिणी ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

अनुराग, भय ओर क्रोध से रहित तुम्हारे राजा होने पर अब असुरो में दुःख रूपी दुर्ग्रन्थि नहीं रहेगी ओर देवताओं में स्थित वह दुःख दुर्ग्रन्थि मेरे द्वारा असुरों का संहार नहीं करायेगी ॥ ३ ७॥ अब जैसे वर्षा ऋतु में बढी हुई बड़ी-बड़ी तरंगवाली नदी वनस्थली को प्लावित कर देती है वैसे ही आंसुओं की धारा असुरनारियों की कर्णमंजरियों को प्लावित नहीं करेगी