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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, Verse 25

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

त्वमजितपदवीमुपागतोऽन्तः कमलजवासरमेकमेव भुक्त्वा । गुणगणकलितामिहैव लक्ष्मीं व्रज परमास्पदमच्युतं महात्मन् ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महात्मन्‌, भीतर भगवान विष्णु की पदवी को प्राप्त हुए तुम ब्रह्मा के एक दिन तक इस पाताल में ही विविध गुणों से युक्त राज्यलक्ष्मी का उपभोगकर विदेह कैवल्य नामक च्युतिरहित परम पद को प्राप्त होओ