Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
तत्र स्थिताः सदा शान्तास्त्वादृशाः पुरुषोत्तमाः ।
सुषुप्तावयवस्पन्दसाधर्म्येण चरन्ति हि ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार से स्थित हुए जीवन्मुक्त लोगों को भी जब तक प्रारब्ध का क्षय नहीं होता तब तक
व्यवहार सिद्धि मे दृष्टान्त कहते है ।
उक्त निर्वक्षेपतारूप शान्ति में सदा स्थित हुए तुम्हारे जैसे शान्त पुरुष गाढ निद्रा में सोये हुए
पुरुष के अवयवों की चेष्टाओं के तुल्य व्यवहार करते हैं