Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
ग्राह्यग्राहकसंबन्धे क्षीणे शान्तिरुदेत्यलम् ।
स्थितिमभ्यागता शान्तिर्मोक्षनाम्नाभिधीयते ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
एेहिक ओर पारलौकिक इष्ट ओर अनिष्टो के साधनों के त्याग ओर उपादान के निमित्त
ग्राह्मग्राहक संबन्ध के नष्ट होने पर रागादिविक्षेपों की शान्ति उत्पन्न होती है । वही रागादि के मूलोच्छेद
स्थिरता को प्राप्त होकर मोक्षनाम से पुकारी जाती है