Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
अकर्तृत्वादभोक्तृत्वमर्थादेव समागतम् ।
संगृहीतं किलानुप्तं केनेह भुवनत्रये ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जब वे कर्ता नहीं हे तब अभोक्तृत्व सहज ही उनमें प्राप्त हो गया ।
भला बतलाइये तो सही, धान आदि के बीज बोये बिना तीनों लोकों में कौन धान आदि का संग्रह करता
है?