Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
महात्मन्संप्रबुध्यस्वेत्येवं विष्णुरुदाहरन् ।
पाञ्चजन्यं प्रदध्मौ च ध्वनयन्ककुभां गणम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार के विष्णु भगवान् ने “हे
महात्मन्, जागो", यह कहते हुए ओर दिकृमण्डल को मुखरित करते हुए अपना पौचजन्य शंख
बजाया