Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 45

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 45 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 45

संस्कृत श्लोक

योऽयं देहपरित्यागस्तल्लोके मरणं स्मृतम् । न सता नासता तेन कारणं वेद्यवेदनम् ॥ ४५ ॥

हिन्दी अर्थ

मरणस्वरूप का पर्यालोचन करने पर भी तत्त्वज्ञानी का मरण संभव नहीं है, ऐसा कहते हैं। जो यह देह का परित्याग है वह लोक में मरणनाम से प्रसिद्ध है। वह त्याग तत्त्वज्ञानी का सत्‌ आत्मा से नहीं किया जा सकता, असत्‌ देह से भी उसका सम्पादन नहीं हो सकता, क्योकि सत्‌ आत्मा के निष्क्रिय होने से उसमें त्याग क्रिया का सम्बन्ध नहीं है और असंग आत्मा का देह संग प्रसिद्ध नहीं है एवं असत्‌ देह से भी स्वपरित्याग असंभव है। यदि कोई शंका करे कि देह की असत्ता में क्या कारण है ? तो उस पर कहते हैं। प्रमाणों द्वारा अवश्य वेदनार्ह (जानने योग्य) आत्मा का ज्ञान ही देह आदि की असत्ता में कारण है, क्योंकि देहादि के सद्भाव की प्रतीति अज्ञाननिबन्धन है