Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verses 2–3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verses 2–3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 2,3
संस्कृत श्लोक
क्षीरोदतलरन्ध्रेण तेनैव स्तम्भिताम्भसा ।
प्रह्लादनगरं प्राप शक्रलोकमिवापरम् ॥ २ ॥
हेममन्दिरकोशस्थं ददर्शात्रासुरं हरिः ।
अथ शैलगुहालीनं समाधिस्थमिवाब्जजम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवान् उसी
क्षीरसागर के तले के छेद से जिसका जल रोक दिया गया था, द्वितीय इन्द्रनगर के तुल्य प्रह्लाद नगर में
गये । वहाँ पहुँचने पर भगवान् श्रीहरि ने प्रह्नादनगर में सुवर्णमय गृह के अन्दर स्थित असुरराज प्रह्लाद
को पर्वत की गुहा में बैठे हुए समाधिस्थ ब्रह्मा के समान देखा