Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इति संचिन्त्य सर्वात्मा क्षीरोदादात्मकात्पुरात् ।
चचाल परिवारेण सह सानुरिवाचलः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे वत्स श्रीरामचन्द्रजी, ऐसा विचारकर सर्वात्मा भगवान् क्षीरसागररूप
अपने नगर से अपने परिवार के साथ अपने शिखरो के साथ पर्वत की नाई चले
सर्ग सन्दर्भ
अड़तीसवाँ सर्ग समाप्त उनतालीसवाँ सर्ग पाताल में जाकर शंखध्वनि से प्रबोधित प्रह्लाद से भगवान् का कल्पपर्यन्त राज्य करने के लिए कहना ।