Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
निमेषान्तरमात्रेण मनः पीवरतां ययौ ।
तस्मिन्प्राणवशात्पूर्णे तरङ्ग इव वारिणि ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पूर्ण जल में तरंग होती है वैसे ही केवल एक निमेष में प्राणों से पूर्ण उसमें मन स्थूलता को प्राप्त हो
गया