Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
चेतनीयोन्मुखी चेत्यं चिन्मनस्तामुपाययौ ।
द्वित्वं मुकुरसंक्रान्ता मुखश्रीरिव राघव ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, चेतनीय विषयोन्मुखी चित् चेत्याकार संस्कार का उद्बोध होने से चेत्य-सी होकर
चिज्जड उभयतारूप मनस्ता को प्राप्त हुई, जैसे कि दर्पण पर पडी हुई मुखश्री द्वित्व को प्राप्त होती
हे