Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
जहर्ष जनितानन्दा वैष्णवी गतसंभ्रमा ।
जनता जलदध्वानफुल्लेव कुटजावली ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
किन्तु जैसे मेघ के शब्द से कुटज वृक्षों की पंक्ति खिल उठती हे वैसे ही भयरहित वैष्णवी जनता
आनन्द को प्राप्त होकर हर्षित हुई