Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
त्रिविष्टपं स्वमनसा पार्थिवं चावलोक्य सः ।
आचारमाजगामाशु पातालमरिपालितम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
वे स्वर्ग का अवलोकन कर, भूलोक के निवासियों के
शुभाशुभ आचरण का अवलोकन कर अपने मन से दैत्यों द्वारा पालित पाताल में शीघ्र गये यानी उन्होने
अपने मन से पाताल की स्थिति का निरीक्षण किया